हथियार डीलर राजीव सिंह के खिलाफ चार्जशीट दाखिल, बिहार-झारखंड के अपराधियों को चुराकर राइफल बेचने का आरोप

<p style="text-align: justify;"><strong>नई दिल्ली:</strong> बिहार के मुंगेर जिले से एके-47 सीरीज के हथियार बरामद होने के मामले में एनआईए ने बिहार की विशेष अदालत में राजीव कुमार सिंह उर्फ चुन्नू सिंह नाम के कथित हथियार डीलर के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट के सामने पेश किया है. चार्जशीट में बताया गया है कि हथियार केंद्रीय आयुध डिपो जबलपुर के कर्मचारियों की मिलीभगत से चुरा कर बेचे गए थे. एनआईए का दावा है कि यह हथियार बिहार और झारखंड के अपराधियों और नक्सलियों को ही बेचे गए थे.</p>
<p style="text-align: justify;">एनआईए के एक आला अधिकारी ने बताया कि मामला 7 सितंबर 2018 को मुंगेर जिले के थाना मुफस्सिल से 3 एके-47 हथियारों की बरामदगी से जुड़ा हुआ है. यह हथियार रिजवाना बेगम नाम की महिला के घर से बरामद किए गए थे और इस मामले में शमशेर आलम नाम के शख्स को गिरफ्तार किया गया था. इस मामले को बाद में जांच के लिए एनआईए को सौंप दिया गया था. एनआईए के आला अधिकारी के मुताबिक जांच के दौरान पता चला कि यह हथियार केंद्रीय आयुध डिपो जबलपुर मध्य प्रदेश के कुछ कर्मचारियों और पूर्व कर्मचारियों की मिलीभगत से चुराकर बेचे गए थे.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>स्मगलिंग करने वाले गिरोह के संपर्क में</strong></p>
<p style="text-align: justify;">इन कर्मचारियों ने एके सीरीज की कई राइफल्स उनके अलग-अलग हिस्से और एसएलआर सीरीज की राइफल्स और उनके अलग-अलग हिस्से केंद्रीय आयुध डिपो जबलपुर से चुराए थे. यह पूर्व कर्मचारी और वर्तमान कर्मचारी हथियारों की स्मगलिंग करने वाले एक गिरोह के संपर्क में थे. केंद्रीय आयुध डिपो से जो ग्रुप हथियार और उनके पार्टस चुराता था, उस ग्रुप का मुखिया केंद्रीय आयुध डिपो का ही एक पूर्व कर्मचारी पुरुषोत्तम लाल रजक था. यह लोग केंद्रीय आयुध डिपो से जो हथियार के पार्ट्स चुराते थे उनके भी जरिए हथियार बना लेते थे और इन हथियारों को बिहार के मुंगेर जिले के हथियार तस्करों को बेच दिया जाता था.</p>
<p style="text-align: justify;">आरोप है कि यह हथियार वहां से अपराधियों और नक्सल तक पहुंचते थे. एनआईए के आला अधिकारी के मुताबिक आज जिस शख्स राजीव कुमार सिंह उर्फ चुन्नू सिंह &nbsp;के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किया गया है, वो इस मामले में शामिल मंजूर आलम का विश्वस्त सहयोगी बताया जाता है. यह भी आरोप है कि इन लोगों ने हथियार बिहार और झारखंड के अपराधियों और नक्सलियों को बेचे थे. एनआईए के आला अधिकारी के मुताबिक इस मामले में 14 आरोपियों के खिलाफ एक चार्जशीट पहले भी कोर्ट के सामने दाखिल किया जा चुका है. एनआईए इस मामले की तह तक जाने के लिए अपनी जांच अभी भी जारी रखे हुए है.</p>
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